Arthritis के कारण है? लक्षण क्या है? हिंदी

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Arthritis क्या है

Arthiritis बीमारी को सामान्य तौर पर गठिया, संधि शोथ कहा जाता है ,गया उसे बचने की प्रवृत्ति लगातार देर तक बैठे रहना रिलीज विलासिता पूर्ण जीवन शैली मोटापे वसायुक्त और डिब्बाबंद भोजन शराब तथा धूम्रपान की लत के कारण कम उम्र के लोगों में भी इसके लक्षण पाए जाते हैं अर्थराइटिस जोड़ों की समस्या है जिसमें जोड़ घीस जाते हैं जोड़ों में खिंचाव कई तरह से और कई कारणों से हो सकता है उम्र के साथ-साथ जोड़ों का घिसना बहुत सामान्य अवस्था है कई लोगों को कम उम्र में भी यह बीमारी हो जाती है जिसे जूबेलाइन क्रॉनिक अर्थराइटिस कहा जाता है हमारे शरीर में लगभग 206 हड्डियां हैं वह 320 जोड़ हैं |जब इनमें पीड़ा होती है तो जीना मुश्किल हो जाता है तब बेंत का सहारा लेना पड़ता है | ज्यादा बढे हुए रोगों में रोगी खटिया पकड़ लेता है |या फिर घिसत घिसत कर चलने पर मजबूर हो जाता है | arthiritis हमारे देश में विकालांगता का मुख्य कारण है |यह बिमारी हदय ,फेफड़े ,किडनी रक्त को भी प्रभावित करती है

Arthritis के कारण

1-असंतुलित भोजन -भोजन में आवश्यक अंश नहीं होने से असंतुलित भोजन करते हैं | भोजन में आवश्यक सभी अंश होने से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है | जिससे रोग का प्रभाव नहीं हो पाता है

2-निष्क्रिय जीवनशैली_ हर अंग से काम लेना चाहिए जिस अंग से काम नहीं लेते वह बेकार हो जाता है | मोटापा कैल्शियम और विटामिन डी की कमी के कारण होता है |ये arthiritis के अन्य कारण है | लेटे लेटे टीवी देखना ,गर्दन ,पीठ ,झुका कर पढ़ना घुटना के कारण अंगों में परिवर्तन होना दुर्घटना के कारण अंगों में परिवर्तन होना दवाइयों के दुष्परिणाम मांस, मदिरा, गरिष्ठ, तले ,भोजन करना आदि

3 अम्लता बढ़ना – हमारे भोजन में प्रोटीन कार्बोहाइड्रेट वसा लिए तले हुए पदार्थ और मीठा अधिक खाने से अम्लता पैदा होती है | जो रक्त में मिलकर हड्डियों के जोड़ों में तथा उनके चारों और जमा हो जाती है यही arthiritis है | इसके विपरीत यदि फल सब्जियां सलाद खाने से 4:00 तक पैदा होता है जो शरीर के स्वस्थ रखता है शरीर को जितने पानी की आवश्यकता होती है उसे कम पानी पीते हैं | इससे अंतर तो बाहर नहीं निकलता है , और सब्जियां ज्यादा खानी चाहिए व मसाले कम खाने चाहिए |

4- फ्लोराइड से जोड़ों का दर्द -फ्लोराइड एक धातु है जिसकी उचित मात्रा हड्डियों के विकास में सहायक है लेकिन अधिक मात्रा बहुत सी विकृतियाँ पैदा कर देती है | फ्लोराइड की अधिक मात्रा से हड्डियों -जोड़ों में कैल्शियम बढ़कर जमा होने लगता हैं | कोमल मासपेशियाँ में जकडन आती है | इससे जोड़ों की गति ,चलने में कठिनाई होती है | फ्लोरोइड का प्रभाव कमर,घुटने,कलाई के जोड़ों पर अधिक होता है ,इनमें सुजन और दर्द होता है | विकृति इतनी बढ़ जाती है की के दोनों घुटने आपस में एक दुसरे से टकराने लगतें हैं | जोड़ों में दर्द ,arthritis आमवात ,गठिया सब शब्दों का अर्थ एक ही हैं | अर्थात हड्डियों के जोड़ों में होने वाला दर्द है |

यूरिक एसिड का घरेलु उपचार कैसे करें

Arthritis दो शब्दों से बना है |

Arthron= joint ,आर्थराइटिस का अर्थ है |जोड़ों का प्रदाह अर्थात जलन सुजन | यह दो प्रकार की होती है |1 ओस्टियो आर्थराइटिस एवं 2-अर्थराइटिस यह दोनों यूरिक एसिड बढ़ने से होती हैं शरीर में अतिरिक्त एसिड निकलकर जोड़ों में जमा होने लगता है जिसके कारण ओर सूजन ,दर्द होने लगता है ,जोड़ों में एसिड के क्रिस्टल जमा होने पर चलने – फिरने पर सुई चुभने जैसा दर्द जकड़न होती है जिससे चलने पर कड़क- कड़क की आवाज आती है | शरीर में यूरिक एसिड बढ़ने पर कई साल लग जाते हैं | जब तक अल्कालिन (छार युक्त खानपान )शरीर के यूरिक एसिड को निष्क्रिय करते रहते हैं तब तक कोई समस्या नहीं पनपती जब किसी कारणवश शरीर में अतिरिक्त एसिड छूटने लगता है तो यह आखिर में जोड़ों के बीच हड्डियों या पेशियों पर जमा होने होना शुरू हो जाता है | तब यह पेशियों में जमा होता है तो मस्कुलर रूमेटिज्म के रूप में सामने आता है ,रोगी को चलने फिरने में बहुत दर्द होता है, उसे हाथ पैर हिलाने में भी दर्द होता है कलाइयां, उंगलियों, पैरों और टखनों के जोड़ और प्राय कलाई एवं कंधों के जोड़ अर्थराइटिस से प्रभावित होते हैं कुछ परिवारों में यह अनुवांशिक रूप से पाई जाती है |

Arthritis के लक्षण

ओस्टियो Arthritis में सूजन नहीं होती परंतु इसमें सुजन अवश्य होती है जो धीरे-धीरे बढ़ती है पहले रोगी की एक संधि जैसे कमर या जांग की संधि में जकड़न के लक्षण प्रकट होते हैं , जो बहुत देर तक बैठ कर उठने के बाद या सो कर उठने के बाद विशेष रूप से महसूस होता है | थोड़ी देर चलने के बाद यह जकड़न कम होने लगती है | इनमें थोड़े दिनों बाद दर्द महसूस होने लगता है | जो चलने फिरने तथा ठंड लगने से बढ़ जाता है दर्द जोड़ों के आसपास होता है | या नर्वरूट के द्वारा जोड़ से दूर तक फैल जाता है लेकिन आराम करने से ठीक हो जाता है | इस रोग में विभिन्न संधियों के भिन्न-भिन्न लक्षण दिखाई देते हैं |

1-कुले की संधियों में जब यह रोग होता है तो रोगी लंगड़ाकर चलने लगता है वह अपने शरीर के भार को स्वस्थ कुले की ओर रखता है इसका दर्द रोगी को आगे या पीछे की ओर प्रभावित करता है |

2- जांघों का ओस्टियो आर्थराइटिस जांघों के जोड़ों में यह रोग हो तो चलने फिरने में दर्द बढ़ता है

3-पीठ का ओस्टियोआर्थराइटिस जब यह रोग रीड की हड्डी विशेषकर गर्दन तथा कमर की कैसे कम होता है तो इसे स्पांडिलाइसिस कहते हैं |

4-घुटने का ओस्टियोआर्थराइटिस इस रोग में घुटने अधिक प्रभावित होते हैं क्योंकि शरीर का भार घुटने पर अधिक होता है इस रोग में घुटने के आगे वाले भाग में भयंकर दर्द होता है|

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